
अजीत मिश्रा (खोजी)
अपराध की दुनिया का ‘पुराना खिलाड़ी’ फिर सलाखों के पीछे: 1.400 किलो गाँजे के साथ शाहरुख गिरफ्तार
- आठ संगीन मुकदमों के बाद भी नहीं सुधरा अख्तर हुसैन, दुधारा पुलिस ने दबोचा
- बेखौफ अपराधी! गैंगस्टर एक्ट भी जिसे न सुधार सका, वह ‘अख्तर’ अब गाँजे की खेप के साथ पहुँचा जेल
- नशे का सौदागर गिरफ्तार: संतकबीरनगर पुलिस ने शातिर शाहरुख को दबोचा, बरामद हुआ भारी मात्रा में अवैध गाँजा
- पुलिया के पास ‘द एंड’: दुधारा पुलिस ने घेराबंदी कर दबोचा नशे का पुराना खिलाड़ी, सलाखों के पीछे कटा टिकट
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (संत कबीर नगर), उत्तर प्रदेश
संतकबीरनगर। जनपद में अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत दुधारा पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने एक ऐसे शातिर अपराधी को दबोचा है, जिसका अपराध की दुनिया से पुराना नाता रहा है। मुखबिर की सूचना पर सक्रिय हुई पुलिस टीम ने दुधारा पुलिया के पास से अख्तर हुसैन उर्फ शाहरुख को 1 किलो 400 ग्राम अवैध गाँजे के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
खाकी का शिकंजा, नशे का सौदागर ढेर
पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर, श्री संदीप कुमार मीणा के निर्देशन और अपर पुलिस अधीक्षक श्री सुशील कुमार सिंह के मार्गदर्शन में दुधारा थाना प्रभारी निरीक्षक अरविन्द शर्मा की टीम ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया। गिरफ्तार अभियुक्त शाहरुख, जो कि परसी गनवरिया का निवासी है, लंबे समय से पुलिस की रडार पर था। वह इलाके में अवैध मादक पदार्थों की सप्लाई कर युवाओं की रगों में जहर घोलने का काम कर रहा था।
अपराधों की ‘लंबी फेहरिस्त’ वाला आदतन अपराधी
हैरानी की बात यह है कि पुलिस रिकॉर्ड में शाहरुख कोई नया नाम नहीं है। उसके खिलाफ पहले से ही 08 गंभीर मुकदमे दर्ज हैं। उसके “क्राइम ग्राफ” पर नजर डालें तो साफ़ पता चलता है कि कानून का खौफ उसके दिल से निकल चुका था:
इतने मुकदमों के बावजूद जेल से बाहर आकर फिर से तस्करी के धंधे में उतरना पुलिस के इकबाल को चुनौती देने जैसा था, जिसे दुधारा पुलिस ने नाकाम कर दिया है।
पुलिस टीम की मुस्तैदी
इस गिरफ्तारी में उप-निरीक्षक रामसूरत प्रसाद, कांस्टेबल सोनू यादव और अरविन्द गौड़ की अहम भूमिका रही। अभियुक्त के खिलाफ मु०अ०सं० 157/2026 के तहत धारा 8/20 एनडीपीएस एक्ट में मामला दर्ज कर उसे न्यायालय रवाना कर दिया गया है।
क्षेत्र में चर्चा का विषय: इलाके के लोग इस कार्रवाई की सराहना कर रहे हैं, लेकिन सवाल यह भी है कि आखिर ऐसे शातिर अपराधी बार-बार जमानत पर बाहर आकर फिर से वही काला धंधा शुरू कैसे कर देते हैं? क्या इस बार जेल की सलाखें उसे सुधार पाएंगी या वह फिर से नई खेप के साथ लौटेगा?


















